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बर्बादी के कगार पर कोटा की कोचिंग इंडस्ट्री, गुनहगार कौन?

इस बार कोटा कोचिंग में एडमिशन पिछले साल से लगभग 45% कम है

up80.online by up80.online
July 14, 2024
in अन्य राज्य, दिल्ली, देश, बिहार, यूपी
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कोटा

कोटा के कोचिंग संस्थान

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आशीष उमराव, कोटा/लखनऊ

खतरे की घंटी बज चुकी है और एक बार फिर से कोटा शहर में वही बेरोजगारी और पलायन का दौर लौटने का अंदेशा बन गया है जो करीब दो दशकों पहले कई बड़े उद्योग बंद होने के बाद हुआ था। इस बार कोटा कोचिंग में एडमिशन पिछले साल से लगभग 45% कम है। कई बड़े कोचिंग सस्थानों द्वारा टीचर्स एवं स्टॉफ की 50% तक अघोषित सैलरी डिडक्शन प्रारम्भ हो चुकी है, कुछ ने अपने स्टॉफ को बिना वजह बाहर का रास्ता दिखा दिया है, कोचिंग इंडस्ट्री में भी ज्यादा सैलरी पाने वाले फैकल्टी की छटनी चालू है, हॉस्टल ख़ाली पड़े हैं और दुकानें बंद होने लगी हैं। आखिर क्यों हुए इस बार एडमिशन कम और क्या फर्क पड़ सकता है इससे?

कोटा में कोचिंग की शुरुआत हुई 90 के दशक में। जल्द ही शहर में कई कोचिंग संस्थान खुलने लगे। पूरे देश से कोटा में बच्चे पढ़ने आने लगे। यहां अलग-अलग कोचिंग शिक्षक अपने ही अंदाज में स्टूडेंट्स को पढ़ाने लगे। स्टूडेंट्स अपनी पसंद के अनुसार शिक्षक से पढ़ते। कोटा शिक्षा का तीर्थ बन गया, जैसे किसी तीर्थ क्षेत्र में छोटे-बड़े मंदिर होते हैं, वैसे ही यहां भी छोटे-बड़े सभी प्रकार के संस्थान थे। कई छोटे-मोटे इंस्टिट्यूट भी खुल गए जैसे करियर पॉइंट, रेजोनेंस, दासवानी क्लासेस, इनसाइट। कोटा के बंसल क्लासेस की साख तो पूरे देश में थी। वहां एडमिशन के लिए भी टेस्ट हुआ करता था।

तस्वीर तब बदलनी शुरू हुई जब एक कोचिंग संस्थान ने खुद की दुकान चमकाने के लिए साम, दाम, दंड, भेद सभी तरीकों का उपयोग करना शुरू कर दिया। और फिर कोटा में शुरू हुआ रातों -रात दूसरे कोचिंग संस्थानों को तोड़ने का दौर। इसने खुद की कोचिंग में जरूरत नहीं होने पर भी दूसरे संस्थानों से शिक्षक भरने शुरू कर दिए ताकि दूसरे संस्थान खत्म हो जाएं। यह रणनीति रंग दिखाने लगी और 2020 आते -आते कोटा के सारे कोचिंग संस्थान खत्म होते गए। कोटा में आने वाले 90% स्टूडेंट्स अब इस कोचिंग में आने लगे।
अभी का हाल देखें तो करियर पॉइंट में बच्चों की संख्या लगभग शून्य है , दासवानी बहुत पहले बंद हो चुका , बहुत सारे नए इंस्टीट्यूट खुले और बंद भी हो गए। बंसल क्लासेस लगभग बंद है , इसमें विद्यार्थियों की कुल संख्या 20 के लगभग होगी । वाइब्रेंट बंद ,  वाइब्रेंट बिल्डिंग में हीं अनएकेडमी चल रहा है जहां कुल संख्या लगभग 2200 है । फिजिक्स वाला भी कोटा में अब बंद के कगार पर आ गया , पहले साल 5 बिल्डिंग ली गई थी , 2022 में पहले सत्र में लगभग 30 हजार बच्चें , दूसरे सेशन में 12 हजार और अब कोटा PW में लगभग 3 हजार बच्चें । रेजोनेंस में कुल लगभग  2000 विद्यार्थी मोशन पुराने करियर पॉइंट के राह पर है , ढंग के शिक्षकों का अभाव है परंतु मार्केटिंग से 8000 से 10,000 विद्यार्थी लिये गये हैं , किसी भी fee पर admission ले सकते हैं। Allen में स्टुडेंट्स की संख्या 60 हजार के लगभग होगी, जो पिछले सेशन से आधे के करीब है।
प्रशासन में अपनी पकड़ का इस्तेमाल कोचिंग मालिकों ने इस कदर किया कि कोटा में कोई इंडस्ट्री नहीं आने दी। यहां तक कि छोटे उद्योगों के लिए बनाए गए इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स और इंद्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया में भी हॉस्टल तान दिए गए। कोटा का पूरा औद्योगिक विकास अवरुद्ध कर दिया और पूरी कोटा की इकॉनमी को मात्र एक कोचिंग केंद्रित कर दिया गया और कोचिंग के मालिक कोटा के अघोषित शाहंशाह बन गए। जिसका उदाहरण देखना हो तो कोटा यूनिवर्सिटी के पास इनकी कोठी देखी जा सकती है जिसके सामने बड़े-बड़े राजा -महाराजा के महल भी फीके नजर आएंगे।

अब इस कोचिंग ने अपना अगला दांव चला और पैसे के लालच में उन्होंने अपनी ब्रांच वहां भी खोल ली जहां से सबसे ज्यादा बच्चे आते थे यानी कि यूपी और बिहार। इसी वजह से कोटा में स्टूडेंट्स आने कम हो गए। दूसरी तरफ कोचिंग के मालिक कोटा के लोगों को झांसा देते रहे कि अभी तो कोटा में और बच्चे आने हैं। इस चक्कर में लोगों ने हॉस्टल बनाने के लिए कोरल पार्क और बेंचमार्क सिटी में महंगे दामों पर जमीन खरीद ली और बर्बाद हो गए। यह सब कोचिंग के मालिकों की बड़े बिल्डर्स के साथ मिली भगत के कारण हुआ।
*अब स्टूडेंट्स के पास कोई कारण नहीं बचा की वो कोटा आयें क्योंकि कोटा की सारे पुराने कोचिंग संस्थान तो एक कोचिंग ने अपनी चालबाज़ियों से बंद करा दिये और इसके मालिकों ने अपना कारोबार बाहर भी शिफ्ट कर दिया।*

दूसरा कारण रहा स्टूडेंट्स की सुसाइड, जिसके लिए भी ये लोग अप्रत्यक्ष जिम्मेदार हैं। अच्छे रिजल्ट देने की धुन में कोचिंग में सभी स्टूडेंट्स को इस तरह से पढ़ाई करवाई कि वे स्ट्रेसफुल होने लगे। यही कारण है कि सुसाइड करने वाले अधिकतर बच्चे यहीं से हैं। प्रशासन ने खूब कोशिश की, गाइडलाइंस जारी की ताकि यह रुके लेकिन इसके मालिकों ने अपने राजनीतिक रसूख़ का इस्तेमाल करके कुछ नहीं होने दिया।

आज कोटा में ना कोई बड़ा संस्थान है और ना ही उद्योग धंधे। यहाँ तक कि कोटा की लाइफ़लाइन समझी जाने वाली कोचिंग इंडस्ट्री को भी कुछ स्वार्थी लोगों ने बर्बाद कर दिया। अब समय आ गया है और लोग भी जागरूक हो गए हैं । लोग अपने बच्चों को अपने शहर में स्थित बड़े छोटे ब्रांड में एडमिशन प्रीफर कर रहे हैं । अब कोटा का पुराना गौरव अपनी दिशा और दशा खोता जा रहा है । कोटा शहर की आर्थिक स्थिति बद से बदहाल होती जा रही है ।

education
आशीष कुमार उमराव, एकेडेमिक मेंटोर

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