क्षेत्रीय अध्यक्ष से प्रदेश महामंत्री पद पर हुआ प्रमोशन
बलिराम सिंह, लखनऊ
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई टीम घोषित कर दी है और इसी टीम के योद्धाओं के साथ वह अगले कुछ महीने में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में उतरेंगे.
नई टीम में पूर्वांचल के बीजेपी के दोनों क्षेत्रीय अध्यक्षों का भी प्रमोशन हुआ है। गोरखपुर के क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय का प्रमोशन कर उन्हें प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है तो काशी के क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल Dilip Patel का प्रमोशन कर सीधे प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया गया है.

दिलीप पटेल Dilip Patel प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से आते हैं और पीएम मोदी के करीबी बताए जाते हैं। वैसे तो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कई ऐसे पटेल नेता हैं, जो काफी पढ़े लिखे हैं, अच्छे वक्ता हैं और संगठन से जुड़े हैं. लेकिन बीजेपी की प्रदेश टीम में काशी से आने वाले दिलीप पटेल को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी मिली।
ऐसे में सवाल यह है कि आखिर दिलीप पटेल किसका विकल्प बनेंगे?

चूंकि यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि दिलीप पटेल जिस क्षेत्र से आते हैं, उस क्षेत्र में पहले से ही भाजपा में कई वरिष्ठ पटेल नेता हैं. दिलीप पटेल मिर्जापुर के चुनार के रहने वाले हैं।
उनके अलावा भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह Omprakash Singh, स्वतंत्र देव सिंह Swatantradev Singh और वराणसी के पूर्व मेयर कौशलेंद्र सिंह Kaushalendra Singh भी चुनार के रहने वाले हैं. ओम प्रकाश सिंह के पुत्र अनुराग सिंह वर्तमान में चुनार से विधायक हैं. ये सभी नेता कुर्मी बिरादरी से आते हैं.

इसके अलावा भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल एस की जमीन भी यही क्षेत्र है.
अर्थात जिस क्षेत्र से कुर्मी बिरादरी ने दो प्रदेश अध्यक्ष दिया, कई मंत्री दिया, उसी क्षेत्र में दिलीप पटेल का कद ऊंचा किया गया. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि दिलीप पटेल किस पटेल नेता का विकल्प बनेंगे?
आपको बता दूँ कि दिलीप पटेल की संगठन में अच्छी पकड़ है. ऐसे में यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो आने वाले समय में दिलीप पटेल और आगे जाएंगे और जब दिलीप पटेल का कद बढ़ेगा तो स्वभाविक है कि किसी का कद घटेगा भी।
इनमें से कई नेता ऐसे भी हैं, जिन्हें कुर्मी बिरादरी के नाम पर संगठन और सरकार में बड़ा पद दिया गया, लेकिन समाज से उनका कोई नाता नहीं है. न तो उन्हें समाज के अधिकारियों की समस्याओं से लेना देना है और न ही समाज के उत्पीड़न से।
अब आने वाले समय में जिस नेता की पकड़ समाज और संगठन दोनों पर होगी, वही इतिहास लिखेगा.
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