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सामाजिक न्याय के प्रतीक थे ओम प्रकाश पासवान

समावेशी नेता थे स्व. ओम प्रकाश पासवान: कमलेश पासवान, केंद्रीय मंत्री

up80.online by up80.online
March 25, 2025
in देश, यूपी, राजनीति
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सामाजिक न्याय के प्रतीक थे ओम प्रकाश पासवान
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कमलेश पासवान, गोरखपुर

पूर्व विधायक स्वर्गीय ओम प्रकाश पासवान Omprakash Paswan का संपूर्ण जीवन जनसेवा और सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित रहा। वे रग-रग और पोर-पोर से एक सच्चे जननेता थे। राजनीति के सच्चे अर्थों में अजातशत्रु, जिन्होंने ने समावेशी राजनीति की।

80 के दशक में उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओम प्रकाश पासवान का उदय मात्र एक व्यक्ति का उदय नहीं था, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता और जन-आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व था। उन्होंने उत्तरप्रदेश के जिला गोरखपुर में सामान्य सीट से विजय प्राप्त कर राजनीति में एक नया अध्याय लिखा। उनके प्रयासों से समाज के पिछड़े तबके को भी अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का साहस मिला। अपने जनसेवा के संकल्प, समाज सुधारक दृष्टिकोण और विकास कार्यों के प्रति समर्पण ने उन्हें जनता के बीच ‘जननेता’ के रूप में स्थापित कर दिया।

बालपन से झलकी नेतृत्व क्षमता और सेवा का जज्बा

15 जुलाई 1952 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के ग्राम राजीसेमरा में जन्मे ओम प्रकाश पासवान का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता श्री राजाराम प्रसाद भारतीय रेलवे में कार्यरत थे, जबकि माता श्रीमती गेंदा देवी एक सरल गृहिणी थीं। बचपन से ही ओम प्रकाश जी अपने कार्यों और व्यवहार से अलग पहचान बनाने लगे।

गांव के हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में उनकी भागीदारी और नेतृत्व क्षमता साफ झलकती थी। पढ़ाई के प्रति उनकी गंभीरता और समाज सेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें प्रारंभिक अवस्था में ही एक उभरता हुआ नेता बना दिया। चारगांवा इंटर कॉलेज, गोरखपुर से माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने पुलिस सेवा में भी कार्य किया, लेकिन उनके मन में जनसेवा का जुनून उमड़ता रहा।

हर चुनाव में जनता का विश्वास, हर पद पर विकास की मिसाल

1983 में जब ओम प्रकाश पासवान ग्राम प्रधान बने, तब उन्होंने अपने नेतृत्व और विकास कार्यों की अनूठी छाप छोड़ी।

1983 में जब ओम प्रकाश पासवान ग्राम प्रधान बने, तब उन्होंने अपने नेतृत्व और विकास कार्यों की अनूठी छाप छोड़ी। वह गोरखपुर के सबसे युवा ग्राम प्रधान के रूप में चुने गए और उनकी कार्यशैली ने पूरे क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता बढ़ा दी। प्रधान संघ के अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के रूप में भी उन्होंने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज कर जनता के दिलों में अपनी जगह बनाई। उनकी लोकप्रियता का चरम 1984 के विधानसभा चुनाव में दिखा, जब उन्होंने सामान्य सीट मनीराम विधानसभा क्षेत्र से विधायक का चुनाव जीता।

उनकी सादगी, ईमानदारी और जनता के प्रति समर्पण ने उन्हें समाज के हर वर्ग का प्रिय नेता बना दिया। 1991 और 1993 में भी उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में प्रचंड बहुमत से न सिर्फ जीत दर्ज की बल्कि हर बार उनके जीत का अंतर बढ़ता गया , जो इस बात का प्रमाण था कि जनता उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली की कायल थी।

दलगत राजनीति से परे जन-आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व

मेरे पिता की राजनीति जाति, धर्म और दलगत सीमाओं से कहीं ऊपर थी।

मेरे पिता की राजनीति जाति, धर्म और दलगत सीमाओं से कहीं ऊपर थी। उनके लिए राजनीति का अर्थ सिर्फ और सिर्फ जनसेवा था। यही कारण था कि वे सामान्य सीट से लगातार जीतते रहे।

उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1996 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें बांसगांव लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया, जहां उनकी रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ उनकी स्वीकार्यता को दर्शाती थी।

असमय बुझा संघर्षशील जीवन का दीप

25 मार्च 1996 का दिन पूर्वांचल के लिए काला दिन बनकर आया, जब एक चुनावी सभा के दौरान मेरे पिता पर बम से हमला किया गया। इस हमले में उनके साथ 14 निर्दोष लोगों की भी निर्मम हत्या कर दी गई। इस घटना ने न केवल मेरे परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया।
लेकिन उनकी शहादत के बाद भी उनका सपना अधूरा नहीं रहा। हमने उनके सिद्धांतों को आगे बढ़ाया और जनता ने उनके विचारों को अपनाकर यह साबित कर दिया कि ओम प्रकाश पासवान एक नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं।

समर्पण और सेवा की जीवंत मिसाल

ओम प्रकाश पासवान जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची राजनीति वही है, जो जनता के लिए, जनता के साथ और जनता के हित में हो। उन्होंने अपने कार्यों से यह सिद्ध कर दिया कि समाज सेवा और विकास के लिए एक सच्चे जनप्रतिनिधि का होना कितना आवश्यक है।
उनकी संघर्षशील यात्रा, अटूट समर्पण और सेवा की भावना आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। वे उन सभी के लिए प्रेरणा हैं, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। उनकी स्मृति में जलाई गई विकास और जनसेवा की मशाल सदैव जलती रहेगी, और उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को सत्कर्म और जनकल्याण की राह दिखाते रहेंगे।

(लेखक कमलेश पासवान केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री हैं एवं बांसगांव से सांसद हैं)

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