बढ़ सकती है क्षेत्रीय असंतुलन की समस्या
देवी सिंह के बाद अब तक राज्यसभा व विधान परिषद में नहीं गया कोई पटेल
यूपी80 न्यूज, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में होने वाले एमएलसी चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इनमें से 5 चेहरे ब्राह्मण हैं। इनके अलावा उत्तर प्रदेश की रिक्त हुईं 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। इसके लिए जोड़तोड़ शुरू हो गया है। लेकिन सवाल है कि इस गणित में गोरखपुर और आजमगढ़ मंडल के पटेलों को मौका मिलेगा या एक बार फिर उनके हिस्से में शून्य बटा शून्य आएगा।
यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि देवरिया के भाजपा के दिवंगत राज्यसभा सांसद देवी सिंह के बाद इस क्षेत्र के पटेलों को न तो उत्तर प्रदेश के उच्च सदन में जाने का मौका मिला और न ही देश की संसद के उपरी सदन में जाने का अवसर मिला। इस क्षेत्र में यदि महाराजगंज जनपद को छोड़ दिया जाए तो गोरखपुर, देवरिया, संत कबीर नगर, आजमगढ़, बलिया और मऊ जनपद के पटेलों की ओर भाजपा और उसके सहयोगी दलों के शीर्ष नेतृत्व का ध्यान ही नहीं गया। इन्हें सिर्फ वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
गरीबी एवं पलायन का दंश झेल रहे गोरखपुर मंडल और आजमगढ़ मंडल में पटेल समाज की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। सरकारी नौकरियों में यहां का पटेल समाज पीछे है। देवरिया जनपद के रुद्रपुर निवासी सामाजिक व्यक्ति अशोक सिंह नाराजगी भरे लहजे में कहते हैं कि देवरिया में समाज की संख्या 6 लाख के करीब है, लेकिन कोई भी राजनीतिक दल पटेलों को मौका नहीं देता है। यह शिकायत भाजपा से ज्यादा है, क्योंकि इस क्षेत्र के पटेल समाज ने भाजपा और उसके सहयोगी दल को ज्यादा प्राथमिकता दी, बावजूद इसके एनडीए गठबंधन ने हमें नजरअंदाज किया। इसलिए अब समाज ने तय किया है कि 2027 में हम उसे ही वोट देंगे, जो हमारी बिरादरी को स्थानीय स्तर पर प्राथमिकता देगा।
सामाजिक व्यक्ति दुर्गा पटेल कहते हैं कि अक्सर देखा जा रहा है कि क्षेत्रीय स्तर पर समाज का ख्याल नहीं रखा जा रहा है, जिन इलाकों में पहले से ही समाज के कई नेता हैं, उन्हीं इलाकों से विधायक के अलावा एमएलसी और सांसद बनाया जा रहा है। उदाहरणस्वरूप वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज जैसे क्षेत्रों में देखा जाए तो यहां पर कई विधायक, मंत्री और सांसद हैं। बावजूद इसके भाजपा और उसके सहयोगी दल द्वारा दर्जा प्राप्त मंत्री भी इन्हीं क्षेत्रों के कुर्मी बिरादरी के नेताओं को बनाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कुछ इलाकों में बिरादरी की स्थिति काफी अच्छी हो जाएगी और कुछ इलाकों में बिरादरी विकास से बहुत दूर हो जाएगी। क्षेत्रीय असंतुलन की समस्या बढ़ जाएगी।












