• About
  • Advertise
  • Contact
Tuesday, October 20, 2026
UP80
  • होम
  • यूपी
  • बिहार
  • दिल्ली
  • राजनीति
  • देश
  • विदेश
  • अन्य राज्य
No Result
View All Result
  • होम
  • यूपी
  • बिहार
  • दिल्ली
  • राजनीति
  • देश
  • विदेश
  • अन्य राज्य
No Result
View All Result
UP80
No Result
View All Result
Home देश

आजादी के पहले ‘नायक’ तिलका मांझी: बिहार के जंगलों से क्रांति का शुभारंभ हुआ

up80.online by up80.online
February 10, 2021
in देश, बिहार, यूपी
0
Tilaka Manjhi

भारत के स्वतंतत्रा संग्राम के पहले शहीद तिलका मांझी (फोटो साभार: भागलपुर विश्वविद्यालय)

0
SHARES
Share on FacebookShare on TwitterLinkedinWhatsappTelegramEmail

1857 से 72 साल पहले अंग्रेजों ने सरेआम तिलका मांझी Tilka Manjhi को दी थी फांसी

बलिराम सिंह, नई दिल्ली

1857 की क्रांति से 80 साल पहले बिहार के जंगलों से ब्रिटानिया हुकूमत के खिलाफ बिगुल बजा था और इस बिगुल की शुरूआत एक आदिवासी नायक Tribal Warrior ने की। उस आदिवासी नायक का नाम था जबरा पहाड़िया। बाद में इस युवक को अंग्रेजों ने तिलका मांझी नाम दिया। अर्थात 1857 में मंगल पांडेय की शहादत से 72 साल पहले तिलका मांझी Tilka Manjhi को फांसी की सजा हुई।

महान लेखिका महाश्वेता देवी जी ने तिलका मांझी Tilka Manjhi के जीवन और उनकी क्रांति पर एक उपान्यास ‘शालगिरर डाके’ की रचना की। तिलका मांझी Tilka Manjhi का जन्म 11 फरवरी 1750 को बिहार Bihar के सुल्तानगंज में ‘तिलकपुर’ नामक गांव में एक संथाल आदिवासी परिवार Santhal tribal family में हुआ था। उनका असली नाम ‘जबरा पहाड़िया’ था। अंग्रेजों ने इन्हें तिलका मांझी नाम दिया। इनके पिता का नाम सुंदरा मुर्मू था।

तिलका ने बचपन से आदिवासी समाज की भूमि, जंगली पेड़ों और संपत्तियों को अंग्रेजों द्वारा लूटते हुए देखा था। इसके खिलाफ अक्सर अंग्रेजों के खिलाफ आदिवासी समाज आवाज उठाता था, लेकिन बड़े जमींदार और अंग्रेज इन्हें दबा देते थे। अंग्रेजों और जमींदारों के खिलाफ धीरे-धीरे आदिवासी समाज की नाराजगी बढ़ती गई। आदिवासी समाज ने इन्हें तिलका मांझी के नेतृत्व में धीरे-धीरे विद्रोह की आवाज तेज करना शुरू कर दिया। उन्होंने अन्याय और गुलामी के खिलाफ जंग छेड़ दिया।

देश सेवा के लिए एकजुटता का आह्वान:

तिलका मांझी ने भागलपुर में स्थानीय लोगों में राष्ट्रीय भावना जगाने के लिए स्थानीय सभाएं करने लगे। आदिवासी समाज को जाति-धर्म से ऊपर उठकर एकजुट होने का आह्वान किया।

गरीबों में बांट दियें अंग्रेजी खजाना:

वर्ष 1770 में बिहार में भीषण अकाल पड़ने पर तिलका मांझी ने अंग्रेजी खजाना को लूट लिया और उसे गरीबों में बांट दिया। तिलका मांझी के इस कार्य से आदिवासी समाज उनसे जुड़ गया और अंग्रेजों के खिलाफ ‘संथाल हुल’ विद्रोह (आदिवासियों का विद्रोह) शुरू किया। उन्होंने अंग्रेजों के साथ-साथ स्थानीय जमींदारों और ठेकेदारों के खिलाफ भी आवाज उठाया।

पढ़ते रहिए www.up80.online महान क्रांतिकारी डॉ.गया प्रसाद कटियार ने 46 दिनों तक भूख हड़ताल कर विश्व रिकार्ड बनाया था

कलेक्टर की हत्या:

तिलका मांझी ने 13 जनवरी 1784 में ताड़ के पेड़ पर चढ़कर घोड़े पर सवाल अंग्रेज कलेक्टर अगस्टस क्लीवलैंड को जहर बुझे तीर से मार कर मौत के घाट उतार दिया। कलेक्टर की हत्या से अंग्रेज सरकार की चूलें हिल गईं। तिलका मांझी को पकड़ने के लिए आदिवासी समाज में फूट डालने की रणनीति अपनाई। अंग्रेजों ने कुछ गद्दारों को अपने साथ मिला लिया। इन्हीं में से एक गद्दार की सूचना पर अंग्रेजों ने तिलका मांझी के ठिकाने पर हमला किया, लेकिन वह बच निकलें और छापमार युद्ध शुरू किया।

पहाड़ की घेराबंदी:

अंग्रेजों ने तिलका मांझी को पकड़ने के लिए पहाड़ की घेराबंदी शुरू की और पहाड़ की ओर जाने वाले सभी रास्तों को रोक दिया। राशन सामग्री को भी रोक दिया। अंत में मजबूर होकर तिलका मांझी को पहाड़ों से नीचे आकर मैदान में लड़ना पड़ा और इस तरह से अंग्रेज सैनिक उन्हें पकड़ने में कामयाब हुए। अंग्रेजों ने उन्हें घसीटते हुए भागलपुर ले गए और उन्हें 13 जनवरी 1785 को फांसी दी। लेकिन बिहार के जंगलों से शुरू हुआ यह विद्रोह 1857 आते-आते पूरे देश में फैल गया और 1857 के बाद भारत की सत्ता ईस्ट इंडिया कंपनी से छीनकर ब्रिटिश सरकार खुद अपने हाथों में ले ली।

चंद्रप्रकाश जगप्रिय द्वारा लिखी गई प्रसिद्ध कविता:

अमरवीर बलिदानी तिलका

के छेलै ? कहियों तें कक्का।

तिलका तिलके मांझी छेलै

तीर-धनुष सें जे कि खेलैं

प्रजाविरोधी पर गुस्सावै

अंग्रेज ते कुछुवों नै भावै।

क्लीवलैंड के काल छेलै ऊ

देशभक्ति के भाल छेलै ऊ

पकड़ैलै तें हांसै छेलै

भलैं निकट ही फांसी छेलै।

आजादी के पहलों सैनिक

ई समझै में केकरा की दिक।

पढ़ते रहिए www.up80.online कारागार राज्यमंत्री जैकी की पुत्री श्रेया सिंह ने फतह किया किलिमंजारो पर्वत 

Previous Post

15 साल बाद ‘कागज’ में ‘जिंदा’ हुए भोला सिंह फिर धरना पर बैठे

Next Post

राजकीय महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव हेतु नामांकन प्रक्रिया स्थगित

up80.online

up80.online

Related Posts

BJP
यूपी

क्या इस बार भी गोरखपुर-आजमगढ़ मंडल के पटेल होंगे नजरअंदाज

October 1, 2026
संजय निषाद की नाराजगी दूर करने निषाद पार्टी के दफ्तर पहुंचे विनोद तावड़े
बड़ी खबर

संजय निषाद की नाराजगी दूर करने निषाद पार्टी के दफ्तर पहुंचे विनोद तावड़े

September 19, 2026
ब्रजेश पाठक और उनकी पत्नी नम्रता पाठक
अखिलेश यादव

जीजाजी मत होइए नाराज, मैं अपने भविष्य को लेकर चिंतित हूं

September 1, 2026
Next Post
Student politics

राजकीय महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव हेतु नामांकन प्रक्रिया स्थगित

महिला किसान

किसान आंदोलन: 18 फरवरी को पूरे देश में ट्रेन रोकेंगे किसान

राज्य निर्वाचन आयोग

यूपी में पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण नियमावली जारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

गांव

अनाज व नौकरशाह दोनों पैदा करते हैं ‘तेरवा दहिगवां’ के किसान

6 years ago
अखिलेश

सपा सरकार में यादव जाति के कितने एसडीएम हुए थे भर्ती, देखें आंकड़ा

4 years ago
चुनाव

अधिशासी अधिकारी सेवा संघ का चुनाव संपन्न

11 months ago
पवन सचान

डॉ.पवन सचान बने एससीईआरटी के निदेशक

3 years ago

Categories

  • अखिलेश यादव
  • अन्य राज्य
  • तेजस्वी यादव
  • दिल्ली
  • देश
  • बड़ी खबर
  • बिहार
  • यूपी
  • यूपी विधानसभा चुनाव
  • राजद
  • राजनीति
  • विदेश
  • सपा

Topics

Akhilesh Yadav Anupriya Patel Apna Dal (S) Azamgarh Ballia Belthra Road bihar bjp BSP CM Yogi Congress death farmers Mirzapur Samajwadi Party Sonbhadra Uttar Pradesh Varanasi yogi govt अखिलेश यादव अनुप्रिया पटेल अपना दल (एस) आजमगढ़ उत्तर प्रदेश ओबीसी कांग्रेस किसान किसान आंदोलन केशव प्रसाद मौर्य कोरोना नीतीश कुमार बलिया बसपा बिहार बीजेपी बेल्थरा रोड भाजपा मायावती मिर्जापुर योगी सरकार वाराणसी सपा समाजवादी पार्टी सीएम योगी सोनभद्र

Highlights

पूर्व सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हमला

अयोध्या विकास प्राधिकरण के ओएसडी वाराणसी का नगर मजिस्ट्रेट नियुक्त

डॉ सोनेलाल पटेल को क्यों याद करें?

काशी के दिलीप पटेल किसका विकल्प बनेंगे?

आजम खान के खिलाफ मुकदमे लड़ रहे 6 शासकीय अधिवक्ताओं की सेवा समाप्त

पिछड़ा वर्ग आयोग की बैठक में उठा 68500 शिक्षक भर्ती का मुद्दा

Trending

BJP
यूपी

क्या इस बार भी गोरखपुर-आजमगढ़ मंडल के पटेल होंगे नजरअंदाज

by up80.online
October 1, 2026
0

बढ़ सकती है क्षेत्रीय असंतुलन की समस्या देवी सिंह के बाद अब तक राज्यसभा व विधान परिषद...

संजय निषाद की नाराजगी दूर करने निषाद पार्टी के दफ्तर पहुंचे विनोद तावड़े

संजय निषाद की नाराजगी दूर करने निषाद पार्टी के दफ्तर पहुंचे विनोद तावड़े

September 19, 2026
ब्रजेश पाठक और उनकी पत्नी नम्रता पाठक

जीजाजी मत होइए नाराज, मैं अपने भविष्य को लेकर चिंतित हूं

September 1, 2026
Uttar Pradesh

यूपी में बिहार जैसा चुनावी ब्रह्मास्त्र ! मातृ शक्ति को 50 हजार की सौगात!

August 13, 2026
पूर्व सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हमला

पूर्व सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हमला

August 13, 2026

About Us

लोकतांत्रिक देश में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है। मीडिया का मुख्य कार्य जनसरोकार से जुड़ी खबरों को आम जनता तक पहुंचाना है, ताकि आम जनता उन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठा सके। इसके अलावा सरकार की किसी भी योजना का आम जनता को कितना लाभ मिल रहा है, उसके जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में आम जनता की समस्याओं का निराकरण कैसे करते हैं। लोकतंत्रिक देश में जनप्रतिनिधि अपनी जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं। ये सभी जानकारी आपको www.up80.online पर मिलेंगी।

Follow us on social media:

Trending

क्या इस बार भी गोरखपुर-आजमगढ़ मंडल के पटेल होंगे नजरअंदाज

संजय निषाद की नाराजगी दूर करने निषाद पार्टी के दफ्तर पहुंचे विनोद तावड़े

जीजाजी मत होइए नाराज, मैं अपने भविष्य को लेकर चिंतित हूं

यूपी में बिहार जैसा चुनावी ब्रह्मास्त्र ! मातृ शक्ति को 50 हजार की सौगात!

पूर्व सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हमला

प्रेमी से बात करने पर रोका तो किशोरी ने उठाया खौफनाक कदम

Others Links

  • Contact
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • About
  • Advertise
  • Contact

Copyright © 2019 up80.online

error: Content is protected !!
No Result
View All Result
  • Home
  • देश
  • राजनीति
  • विदेश
  • बिहार
  • यूपी
  • वीडियो
  • दिल्ली

Copyright © 2019 up80.online