अशासकीय विद्यालयों में आरक्षण की अनदेखी पर ओबीसी महासभा ने उठाए सवाल
यूपी80 न्यूज, लखनऊ
ओबीसी महासभा ने जातिगत जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की स्पष्ट गणना, सरकारी एवं निजी भर्तियों में आरक्षण के प्रभावी अनुपालन तथा अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पदों पर आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग की है।
महासभा का कहना है कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की बात तभी सार्थक होगी, जब पिछड़े वर्गों को शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक नेतृत्व के अवसरों में वास्तविक भागीदारी मिलेगी।

लखनऊ स्थित प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ओबीसी महासभा के प्रदेश प्रभारी डा. अनूप पटेल ने कहा कि जातिगत जनगणना के प्रपत्र में प्रश्न संख्या 10 के अंतर्गत संवैधानिक श्रेणी SEBC (सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग) को राज्यवार ड्राफ्ट सूची के साथ शामिल किया जाना चाहिए, ताकि अन्य पिछड़े वर्गों की वास्तविक सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का विश्वसनीय आकलन हो सके।
डा. पटेल के अनुसार, पिछड़े वर्गों की आबादी और उनकी सामाजिक स्थिति के प्रमाणिक आंकड़ों के अभाव में नीतियों का निर्माण और योजनाओं का लाभ समान रूप से सुनिश्चित करना कठिन है।
महासभा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील निषाद ने बताया कि अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में सहायक अध्यापक (स्नातक वेतनक्रम) के विषयवार आरक्षित पदों से संबंधित उपलब्ध सारणी का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षण की स्थिति का विषयवार, विद्यालयवार और पदवार परीक्षण आवश्यक है।
प्रस्तुत सारणी में बालक एवं बालिका विद्यालयों के लिए अलग-अलग तथा संयुक्त रूप से पदों का विवरण दिया गया है। इसके अनुसार, संयुक्त श्रेणी में कुल 17,735 पद दर्शाए गए हैं, जिनमें सामान्य वर्ग के 6,704, अनुसूचित जाति के 3,698, अनुसूचित जनजाति के 13, ओबीसी के 4,438 और ईडब्ल्यूएस के 2,882 पद शामिल हैं।
महासभा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मिथलेश शर्मा ने बताया कि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और लागू आरक्षण नियमों के परीक्षण के आधार पर यह निर्धारित किया जाना चाहिए कि विभिन्न वर्गों को उनके नियमानुसार अवसर मिल रहे हैं या नहीं। केवल कुल आरक्षित पदों की संख्या पर्याप्त नहीं है; भर्ती प्रक्रिया, विषयवार रिक्तियों, नियुक्तियों और वास्तविक प्रतिनिधित्व का भी सार्वजनिक विवरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
महासभा की महिला अध्यक्ष शशि पटेल ने विशेष रूप से अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पदों पर आरक्षण की व्यवस्था और उसके अनुपालन को लेकर सवाल उठाए हैं।
यदि शिक्षक स्तर पर आरक्षण का प्रावधान लागू है, तो प्रधानाचार्य जैसे महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी पदों पर आरक्षण की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। इन पदों पर नियुक्ति में लागू संवैधानिक प्रावधानों, संबंधित सेवा नियमों और न्यायिक निर्णयों की पारदर्शी समीक्षा होनी चाहिए। महासभा प्रदेश सरकार से मांग करती है कि अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रधानाचार्य पदों पर लागू कानूनी व्यवस्था को सार्वजनिक किया जाए तथा जहां आरक्षण लागू है, वहां उसका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। यदि वर्तमान नियमों में किसी प्रकार की विसंगति या प्रतिनिधित्व संबंधी समस्या है, तो उसका विधिसम्मत समाधान किया जाए।
महासभा ने कहा कि सामाजिक न्याय का अर्थ केवल आरक्षण की घोषणा करना नहीं, बल्कि उसके लाभ को वास्तविक रूप से पात्र समुदायों तक पहुंचाना है। पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के आंकड़े, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और शैक्षणिक संस्थानों के नेतृत्वकारी पदों पर उचित प्रतिनिधित्व—इन सभी प्रश्नों पर सरकार को स्पष्ट नीति और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
ओबीसी महासभा की प्रमुख मांगें:
1 जातिगत जनगणना के प्रपत्र में SEBC/OBC की स्पष्ट और प्रमाणिक गणना सुनिश्चित की जाए।
2 जातिगत जनगणना में राज्यवार पिछड़ा वर्ग सूची को शामिल करने की मांग पर विचार किया जाए।
3 सरकारी एवं निजी क्षेत्र की भर्तियों में लागू आरक्षण संबंधी प्रावधानों और उनके अनुपालन की स्थिति स्पष्ट की जाए।
4 अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में सहायक अध्यापक पदों पर विषयवार आरक्षण और वास्तविक नियुक्तियों का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
5 अशासकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्य पदों पर लागू आरक्षण संबंधी नियमों, न्यायिक स्थिति और प्रतिनिधित्व का आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाए।
6. पिछड़े वर्गों को शिक्षा, रोजगार और संस्थागत नेतृत्व में समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।












