फागू चौहान के बिहार का राज्यपाल बनने के बाद आयोग का चेयरमैन पद रिक्त
लखनऊ, 26 फरवरी
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को शायद पिछड़ों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। चेयरमैन न होने की वजह से पिछले सात महीने से उत्तर प्रदेश अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग सफेद हाथी बना हुआ है। आयोग के चेयरमैन फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाए जाने के बाद आयोग की अब तक एजेंडा आधारित कोई बैठक ही नहीं हुई। मात्र एक बार सामाज कल्याण मंत्री अनिल राजभर ने आयोग के सदस्यों की बैठक ली थी और इस बैठक में सदस्यों से केवल परिचय पूछा था।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को 2018 में संवैधानिक अधिकार देने के बाद केंद्र सरकार के पिछड़ों की हितैषी होने का खूब ढोल पिटा गया। लेकिन मौजूदा स्थितियों में जिस तरह से संविधान प्रदत्त आरक्षण को नजरअंदाज किया जा रहा है, उससे पिछड़ा वर्ग में खासा नाराजगी है। विशेषकर उत्तर प्रदेश में पिछड़ों के अधिकारों पर सर्वाधिक कुठाराघात किया जा रहा है।
आयोग का चेयरमैन पद पिछले सात महीने से रिक्त पड़ा है, लेकिन अब तक योगी सरकार ने इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति का संज्ञान नहीं लिया। वर्तमान में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा ओबीसी आरक्षण को लेकर जिस तरह से अतार्किक निर्णय लिया गया है, इससे ओबीसी सामाज में नाराजगी बढ़ गई है। अधिकांश भर्तियों में अधिक कट-ऑफ लाने के बावजूद पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में शामिल नहीं किया जा रहा है। ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति प्रतिपूर्ति मामले में अनियमितता बरती जा रही है।
सामाजिक चिंतक एवं लखनऊ हाईकोर्ट के एडवोकेट आलोक वर्मा कहते हैं कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ओबीसी चेयरमैन की तत्काल नियुक्ति होनी चाहिए, ताकि पिछड़ों की समस्याओं का जल्द से जल्द निदान हो सके। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ.अनूप पटेल कहते हैं कि यह सरकार पूरी तरह से पिछड़ा और दलित विरोधी है। यह सरकार आरक्षण को खत्म करना चाहती है। इसी वजह से कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी आराक्षण बचाओ यात्रा शुरू की है।













