राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के पति डॉ.मफतलाल पटेल ने स्कूलों को उपहार के बदले कुर्सी-टेबल देने की शुरू की थी मुहिम
लखनऊ, 5 सितंबर
शिक्षक दिवस के अवसर पर हम ऐसे महान व्यक्तित्व की जानकारी देने जा रहे हैं, जिसके जीवन का अनुसरण खुद उत्तर प्रदेश की महामहिम आनंदीबेन पटेल करती हैं। यह महान व्यक्तित्व कोई और नहीं हैं, बल्कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के जीवन साथी एवं शिक्षाविद् डॉ.मफतलाल पटेल हैं। विशुद्ध् तौर पर गांधीवादी डॉ.मफतलाल पटेल के सामाजिक जीवन की अनेक कहानियां हैं, लेकिन आज शिक्षक दिवस पर शिक्षकों एवं छात्रों के लिए उनके द्वारा किए गए सराहनीय कार्य की जानकारी खुद उनकी पुस्तक ‘डॉ.मफतलाल पटेल एक सामाजिक मसीहा’ के हवाले से यहां दी जा रही है,,
बात उन दिनों की है, जब डॉ.महफतलाल पटेल अहमदाबाद जिला शिक्षण समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने अहमदाबाद जिला के प्राथमिक शिक्षण और विद्यालयों को सुधारने के लिए अनोखा आंदोलन चलाया। उन्होंने अपील की,
“मुझे किसी उपहार की बजाय विद्यालय के लिए कुर्सी-टेबल और बिछौने दो।“
डॉ.मफतभाई की इस अपील का अहमदाबाद के सामान्य जनमानस पर गहरा असर पड़ा। इस आंदोलन के जरिए उन्होंने अहमदाबाद जिले की 1056 विद्यालयों के जीर्णोद्वार के लिए 65 लाख रुपए का दान इकट्ठा किया।
दान की जरूरत क्यों थी:
मफतभाई कहते हैं कि अहमदाबाद जिले की 1056 विद्यालयों के सवा दो लाख विद्यार्थी विद्यालय में अत्यंत दनयीन हालत में पढ़ते थे। 400 कमरे तो बिल्कुट टूट गए थे। 1000 कमरे कम होने के कारण बच्चे पेड़ के नीचे या मैदान में बैठकर पढ़ते थे। एक भी विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए बैंच या आसन नहीं थे। अहमदाबाद शहर के आसपास 1000 गांवों के दो लाख विद्यार्थियों की हालत बदतर थी। 400 विद्यालय ऐसे थे, जिसमें ब्लैकबोर्ड नहीं थे। 800 विद्यालय की खिड़की-दरवाजे टूट गए थे। ऐसे विद्यालयों में कुत्ते, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता था।
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दान की शुरूआत खुद करते थे डॉ.मफतभाई:
इस आंदोलन की एक विशेषता और थी। डॉ.मफतलाल पटेल खुद दान की शुरूआत करते थे और भाषण देकर गांव वालों को समझाते, “सरकार इन विद्यालयों को फूटी कौड़ी भी देने वाली नहीं। मांगने जाओगे तो सालों निकल जाएंगे। विद्यालय आपका है, आपके बच्चे यहां पढ़ेंगे, क्यूं न आप ही इसे विद्याधाम बनाते?” डॉ.मफत भाई के शब्दों का असर ऐसा हुआ कि केवल छह महीने में 200 विद्यालयों में से 180 विद्यालयों में सारी सुविधा उपलब्ध करवाकर बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाया।
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