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प्रियंका गांधी को रोकने की बजाय आदिवासियों की चिंता किए होते हुजूर

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July 19, 2019
in देश, बड़ी खबर, यूपी, राजनीति
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Sobhadra, Murtia village Massacre

सोनभद्र में मारे गए आदिवासियों के परिजनों से मिलने जाते समय प्रियंका गांधी को पुलिस ने हिरासत में लिया

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सोनभद्र में मारे गए आदिवासियों के परिजनों से मिलने जा रही थीं प्रियंका गांधी

सोनभद्र / लखनऊ, 19 जुलाई

गजब का है सिस्टम, पुलिस निर्दोष आदिवासियों की सुरक्षा तो नहीं कर सकी, लेकिन इन आदिवासियों के दु:खों पर मलहम लगाने गईं कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी को हिरासत में जरूर ले ली। यदि पहले ही प्रशासन चौकस रहता तो बुधवार को 11 निर्दोष आदिवासियों की बर्बरता पूर्वक हत्या न होती। योगी सरकार ने शुक्रवार को प्रियंका गांधी को हिरासत में लेकर विपक्ष को लगे हाथ एक और मुद्दा दे दिया, जिसकी वजह से सत्ता पक्ष की और अधिक किरकिरी हो गई। प्रशासन के इस रवैये के खिलाफ प्रियंका गांधी धरने पर बैठ गईं।

यह भी पढ़िये: अंजू कटियार के बारे में यह भी जानिए, फिर फैसला कीजिए

प्रियंका गांधी शुक्रवार को वाराणसी से सोनभद्र के घोरावल क्षेत्र के मूर्तिया गांव (घटना स्थल) जा रही थी। रास्ते में मिर्जापुर जनपद के नारायणपुर पुलिस चौकी पर प्रशासन ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने पुलिस से सवाल किया कि उन्हें किस कानून के तहत रोका गया। उधर, इस मामले में डीजीपी ओपी सिंह ने कहा है कि प्रियंका गांधी को हिरासत में नहीं लिया गया है। बता दें कि सोनभद्र के मूर्तिया गांव में प्रशासन ने धारा 144 लगा दिया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अनूप पटेल कहते हैं कि यह एक अति निंदनीय घटना है। प्रदेश की तानाशाही सरकार पीड़ितों को न्याय दिलाने की बजाय तानाशाही रवैया अपना रही है।

यह भी पढ़िये: अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन से ओबीसी, एससी-एसटी का बढ़ेगा प्रतिनिधित्व 

ये है मामला:

जानकारी के अनुसार 65 साल पहले बिहार के आईएएस अधिकारी प्रभात कुमार मिश्रा ने स्थानीय तहसीलदार के साथ मिलकर 600 बीघा जमीन को आदर्श कोआपरेटिव सोसायटी के नाम करा लिया। जबकि आदिवासी 1947 से पहले से जमीन पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं। हालांकि सोसायदी का रजिस्ट्रेशन 1976 में खत्म हो गया। बावजूद इसके आईएएस मिश्रा ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलीभगत करके 6 सितंबर 1989 को अपनी पत्नी और पुत्री के नाम जमीन करा दिया, जबकि कानूनन सोसायटी की जमीन किसी व्यक्ति के नाम नहीं हो सकती। आरोपी यज्ञदत्त गुर्जर ने इसी का लगभग 160 बीघा जमीन वर्ष 2010 में अपने रिश्तेदारों के नाम करा लिया। जबकि जमीन पर खेती का कार्य आदिवासी कर रहे थे।

200 से ज्यादा हमलावर थे:

बुधवार को स्थानीय प्रधान इसी जमीन पर कब्जा करने के लिए 32 ट्रैक्टरों में लगभग 200 से ज्यादा हमलावरों के साथ पहुंचा था, जिसका स्थानीय गोंड आदिवासी समाज के लोगों ने विरोध किया था। आदिवासियों के विरोध पर प्रधान के लोगों ने फायरिंग और गड़ासे, भाले से हमला किया।

यह भी पढ़िये: एमपी से यूपी में ब्याह कर आते ही आदिवासी से दलित हो जाती है कोल समाज की बेटी

जानकारी के अनुसार पिछले दिनों तहसील दिवस पर ग्राम प्रधान की तरफ से जमीन को कुर्क करने का आवेदन किया गया था। उधर, यह मामला अदालत में लंबित है और कल आदिवासी इस समस्या को लेकर कमिश्नर ऑफिस जाने वाले थे।

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