यूपी80 न्यूज, लखनऊ
उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग द्वारा प्रदेश के स्थानीय निकाय कर्मचारियों के साथ पिछले 9 वर्षों से उनकी सेवा संबंधी व अन्य मांगों व समस्याओं पर कोई सकारात्मक समाधान नहीं किए जाने से कर्मचारियों में गहरी निराशा है। जबकि उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ ने इन 9 वर्षों में सैकड़ों ध्यानाकर्षक आंदोलन, समय-समय पर शासन स्तर पर बैठकें व क्रमिक अनशन व ज्ञापन आदि के माध्यम से प्रदेश सरकार व शासन से अनुरोध किया जा चुका है।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शशि कुमार मिश्रा का कहना है कि महासंघ द्वारा अनेको बार मुख्यमंत्री महोदय के संज्ञान हेतु पत्राचार व ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराने का प्रयास किया गया, परन्तु खेद है कि सम्भवतः मुख्यमंत्री जी के संज्ञान में हमारे प्रदेश के निकाय कर्मचारियों की पीड़ा अथवा उनकी समस्याओं से हमारे विभाग के अथवा उच्च स्तर के अधिकारियों ने कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान हेतु कोई सकारात्मक पहल नहीं की गयी।
जिससे आज प्रदेश के स्थानीय निकाय कर्मचारियों की इन 9 वर्षो में महासंघ द्वारा प्रेषित मांग पत्र के किसी एक बिन्दु पर कोई निर्णय अथवा उनके आदेश जारी नहीं हो सके। वहीं, आजादी के 78 वर्ष व्यतीत होने के बाद आज तक निकाय कर्मचारियों की अकेन्द्रियत सेवा नियमावली नहीं बन सकी और न ही वर्ष 2001 से कार्यरत दैनिक वेतन, संविदा व तदर्थ कर्मचारियों का वर्ष 2016 में जारी शासनादेश के क्रम में विनियमतीकरण अथवा स्थायीकरण ही हो सका। उन्होंने कहा कि इस तरह की 10 सूत्रीय मांग पत्र का समाधान अभी तक नहीं हो सका।
शशि कुमार मिश्र ने कहा कि आज प्रदेश के लाखों स्थानीय निकाय कर्मचारी व उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। उसे अपने मौलिक अधिकार व सेवा सम्बन्धी लाभों से वंचित होकर सेवानिवृत्त होने पर मजबूर है।
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