कोरोना काल में कोसी बाढ़ग्रस्त इलाकों में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की उड़ रही हैं धज्जियां
यूपी80 न्यूज, पटना/नई दिल्ली
“बिहार Bihar के कोसी बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में नावों की कमी और राहत शिविरों की स्थिति बदहाल है। कोरोना काल में इन इलाकों में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना मजाक बन कर रह गया है।“ बिहार के कोसी बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर रही ‘युवा हल्ला बोल’ की टीम ने यह मुद्दा उठाया है।
टीम के पदाधिकारियों ने कोरोना और बाढ़ की दोहरी मार को देखते हुए वायरस के संक्रमण की चिंता जताई और प्रशासन से इस पर किसी भी तरह की लापरवाही न करने की अपील की है। नावों की पर्याप्त संख्या न होने के कारण एक नाव में ही कई लोग सवार होने को मजबूर हैं जिससे “दो गज दूरी” जैसे सुझाव मज़ाक बनकर रह जाते हैं। साथ ही, ‘युवा हल्ला बोल’ के सदस्यों ने ये भी पाया कि बाढ़ से पीड़ित लोग न मास्क पहन पा रहे, न ही अपने हाथों को वायरस-मुक्त रखने के उपाय कर रहे हैं। बिहार के इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था भी दयनीय है। इसलिए पदाधिकारियों का मानना है कि संक्रमण बढ़ने की सूरत में भारी तबाही मच सकती है।
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बाढ़ राहत शिविरों की स्थिति काफी खराब है। कई शिविरों की स्थिति इतनी बदहाल थी कि उनका उपयोग सिर्फ पशुओं को बांधने के लिए किया जा रहा है। ऐसे वक्त में जब लाखों की आबादी बाढ़ की विभीषिका झेल रही है तो राहत शिविरों की दुर्दशा चिंता का विषय है।
‘युवा हल्ला बोल’ संस्थापक अनुपम ने बिहार सरकार से अपील किया है कि प्रदेश की सरकार आजकल जितना ध्यान मुम्बई में लगा रही है उतना ही बाढ़ पीड़ितों की परेशानी दूर करने पर भी लगाए। नावों की पर्याप्त व्यवस्था कराई जाए, राहत शिविरों को दुरुस्त किया जाए और बाढ़ के साथ साथ कोरोना संक्रमण से भी बचाव के उपाय सुनिश्चित किए जाएं।
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