किसान आंदोलन में हुई किसानों की मौतों का आंकड़ा सरकार के पास नहीं है, किसान संगठनों ने जताई नाराजगी
यूपी80 न्यूज, नई दिल्ली
नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले आठ महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों का आंदोलन अब जंतर-मंतर पर होगा। कल से मानसून सत्र समाप्त होने तक संसद के प्रत्येक कार्य दिवस पर संयुक्त किसान मोर्चा की दो सौ किसानों की टुकड़ी जंतर-मंतर पर पहुंचकर सरकार के विरोध में अपनी किसान संसद आयोजित करेगी। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
इसी तरह केरल के सभी 14 जिला मुख्यालयों पर किसान संगठन धरना देंगे। इसके अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु और अन्य दूरस्थ राज्यों से भी किसानों की टुकड़ी पहुंच रही है।
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव कहते हैं कि केंद्र और विभिन्न राज्यों की भाजपा सरकारों ने किसान आंदोलन को समाप्त करने के लिए नेताओं पर झूठे मुकदमे लगाए गए, नेताओं को जेल में डाला गया, विरोध स्थलों की आपूर्ति में कटौती, किसान मोर्चा के चारों ओर बैरिकेड्स लगाए के प्रयास किए गए। सरकार ने किसानों को बदनाम करने की पूरी कोशिश की है।
किसानों की मांग:
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सरकार ने संसद के पटल पर किसान आंदोलन की मांगों को सही ढंग से नहीं रखा। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मामले में मोर्चा का कहना है कि सभी कृषि उपज पर सी2 प्लस 50 परसेंट फॉर्मूला के साथ घोषित एमएसपी पर कानूनी गारंटी चाहिए। किसान संगठन तीनों नए कृषि कानून को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन में अब तक 537 किसान शहीद:
किसान संगठनों ने दावा किया है कि 10 जुलाई तक इस आंदोलन में 537 किसान शहीद हो चुके हैं। हालांकि सरकार पास इस तरह का कोई आंकड़ा नहीं है।
उधर, हरियाणा के सिरसा में सरदार बलदेव सिंह सिरसा का अनिश्चितकालीन अनशन पिछले 4 दिनों से जारी है।













