सत्यापन में फर्जी निकले दाखिल दस्तावेज
यूपी 80 न्यूज़, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग ने आजमगढ़ मंडल के 22 शिक्षकों को फर्जी दस्तावेजों के कारण बर्खास्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने एक बड़े करप्शन के मामले में आजमगढ़ मंडल में चयनित 22 शिक्षकों को टर्मिनेट किए जाने का फैसला लिया है। इन शिक्षकों पर आरोप है कि नियुक्ति के दौरान इन्होंने जो डॉक्युमेंट जमा किए थे, वो फर्जी पाए गए हैं।
इनके अंकपत्र प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से बनाए गए। इनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया है। इन पर एफआईआर दर्ज कराने का भी आदेश दिया गया है। ये नियुक्तियां 2014 की हैं। नियुक्ति के बाद से लेकर अब तक इन 22 शिक्षकों को जो वेतन भुगतान किया गया है, उसकी भी रिकवरी करने का आदेश जिला विद्यालय निरीक्षक को दिया गया है। इस मामले में 20 अगस्त को शिक्षा निदेशक यूपी की ओर से एक लेटर जारी किया गया है।इसमें ऐक्शन के लिए उन जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है, जिनके दायरे में ये 22 शिक्षक पोस्टेड हैं।
ये शिक्षक जौनपुर, बलिया, आजमगढ़, मीरजापुर. बाराबंकी, सहारनपुर और लखनऊ जैसे जिलों में पोस्टेड हैं। प्रेस नोट में बताया गया है कि 21 अप्रैल 2014 को स्नातक वेतन क्रम में पुरुष और महिला संवर्ग में शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था।आजमगढ़ मंडल में निकाला गया विज्ञापन सहायक अध्यापक के पद पर भर्ती का था,जो आवेदन आए उनकी मेरिट बनाकर काउंसिलिंग के माध्यम से ये खाली पद भरे गए थे। जब इन कैंडिडेट्स के डॉक्युमेंट की जांच हुई, तो वो फर्जी निकले। पिछले दिनों यूपी के मऊ जिले में एक बड़ा घोटाला सामने आया था। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति का मामला था। इस मामले में 42 शिक्षकों की कथित फर्जी नियुक्ति के लिए 86 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक जांच के बाद 42 शिक्षकों का वेतन भी रोक दिया गया था। मऊ की समाज कल्याण अधिकारी की शिकायत पर 5 अगस्त को एफआईआर दर्ज की गई थी। इस केस में 86 लोगों को नामजद किया गया है। तीन पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी, तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी, चार खंड शिक्षा अधिकारी, विभाग के सुपरवाइजर डेस्क सहायक, 42 शिक्षक और सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों के 19 प्रबंधक शामिल हैं।