अनुप्रिया पटेल ने वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट पर बसने वाले डोम समाज की समस्याओं को संसद में उठाया, बिजली के जरिए शवदाह व्यवस्था की मांग की
नई दिल्ली / मिर्जापुर
हमारे शास्त्रों में कहा जाता है कि जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार वाराणसी में होता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। अर्थात व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति में हमारे डोम समाज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन आज वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट पर बसने वाले डोम समाज के लोगों का जीवन काफी कठिनाईपूर्ण हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को डोम समाज से संबंधित इन ज्वलंत समस्याओं को संसद के पटल पर रखते हुए मांग की कि डोम समाज के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, स्वच्छ भारत योजना, सौभाग्य योजना से लाभान्वित किया जाए। इसके अलावा वाराणसी के प्रमुख घाटों पर बिजली के जरिए शवदाह व्यवस्था करने की भी मांग की।
श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार डोम समाज की आबादी 110353 है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने डोम समाज को पवित्र अग्नि उपहार स्वरूप दी, जो एक हिन्दू व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति प्रदान करता है। इन्हें पवित्र ज्योति का रखवाला भी कहा जाता है।
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श्रीमती पटेल ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि मृत्यु को गरिमा प्रदान करने वाले डोम समाज को आज भी अस्पृश्य, अछूत, समझा जाता है। उनके काम को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता है। उन्हें शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों से वंचित रखा जाता है। इस समाज की नई पीढ़ी के युवाओं को जो यह परंपरागत कार्य नहीं करना चाहतें हैं, उन्हें अवसर नहीं मिलता है।
श्रीमती पटेल ने कहा कि डोम समाज के लोग पारिवारिक परंपरा के अनुरूप शवदाह स्थलों पर जो काम करते हैं, उसमें अनेक चुनौतियां हैं। शवदाह स्थल पर शव के जलने से उठने वाले धुएं से इन लोगों को फेफड़ों के रोग हो जाते हैं। और इस प्रक्रिया में उठने वाली दुर्गंध से बचने के लिए छोटी उम्र में इस समाज के बच्चे ड्रग्स एवं शराब के नशे की चपेट में आ जाते हैं क्योंकि यह नशा दुर्गंध को सहने के लिए उनके होश को सुन्न कर देती है।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती पटेल ने आग्रह किया कि डोम समाज के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, स्वच्छ भारत योजना, सौभाग्य योजना से लाभांवित किया जाए। इसके अलावा वाराणसी के प्रमुख घाटों पर बिजली के जरिए शवदाह की व्यवस्था की जाए।











